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NABI KI SADGI PART 2

इसी तरह प्यारे नबी गधे की सवारी भी किया करते थे जब-के उस ज़माने में ऊंट और घोड़े भी थे जो अमीर और बड़े लोगों के पास होते थे और आप ने इन की भी सवारी की है लेकिन आप की सादगी/simplicity गधे की सवारी में ही थी। आप बिना तकलीफ गधे की सवारी किया करते थे। यह आप की सादगी की एक अलामत /निशानी है। आज अगर कोई पैदल चले या साइकल /cycle पर चले तो लोगों की नज़र में वह ''बेचारा ''बन जाता है। लोग अंदाज़ा लगते है की बेचारा गरीब है। लोगों की नज़र में चीज़ों की नुमाइश /display करने वाले इज़त-दार होते है। और सादगी /simplicity अपनाने वाले बेचारे या फिर गरीब होते है। जिन के पास है उन्हें चाहिए की अगर ज़रूरत हो तो car या bike का इस्तेमाल करें लेकिन जहाँ ज़रूरत न हो वहां सादगी/simplicity को इस्तेमाल करना चाहिए मतलब पैदल या फिर ट्रैन जैसी चीज़ों का इस्तेमाल करना चाहिए। आदमी को ज़मीं पर भी कदम रखना चाहिए ता के घमंड का इलाज भी होता रहे। इसी तरहा आप गुलामों की दावत भी कुबूल करते थे। उस ज़माने में गुलामों को छोटा और निचा समझा जाता था। आप उन की इज़त बढ़ाने के लिए और ऊँच निचे का बेध-भाव ख़तम करने के लिए उन की दावत कुबूल करते थे। आज सभी लोग तो नहीं लेकिन हमारे समाज का एक तबका ऐसा है जो कमज़ोरों की दावत को कुबूल करना ,उन की शादी बियाह में शामिल होना ,उन की मिटी /मौत में जाना ,अपने लिए बेइज़ती समझते है। कोई ज़बान से ज़लील /बेइज़त नहीं करता लेकिन उन का अमल ये बता देता है। एक नबी ,पैगम्बर के बराबर इंसानो में कोई नहीं हो सकता लेकिन प्यारे नबी ने कमज़ोरों और गुलामों के साथ भी अच्छा सुलूक /behavior कर के यह साबित कर दिया के तमाम /सभी इंसान बराबर हैं। दुन्या में कोई छोटा कोई बड़ा नहीं है। आख़िरत में खुदा फैसला करे गा के अमाल की बदौलत कौन इज़त के लाएक है और कौन ज़लील और बेइज़त होने के लाएक है। आदमी को हर वकत अपनी फ़िक्र करते रहना चाहिए के कहीं घमंड ,बड़ाई तो पैदा नहीं हो गई इस में।
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