Tenali raman

     राजा कृष्णा देव राय के राज्य विजयनगर में तेनाली रमन एक बोहत समझदार और चालाक सलाहकार थे। जब भी राजा को कोई भी काम करना होता तो अपने सलाहकार से ज़रूर सलाह लिया करते थे। एक बार राजा कृष्णा देव राय की ऊँगली फल काटते वक़्त कट गई। जिस पर तेनाली रमन ने कहा के  ''जो होता है वो हमारे अच्छे के लिए ही होता है'' तेनाली रमन की इस बात पर राजा कृष्णा देव राय को बोहत गुस्सा आया। उन्हों ने कहा मेरी ऊँगली कट गई ये तुम्हे अच्छी बात लगती है? गुस्से में राजा ने तेनाली रमन को कारागार/jail में डाल दिया।
     एक दिन राजा कृष्णा देव राय अपने सिपाहियों के साथ जंगल में शिकार पे गए। दुर्भाग्य पूण राजा जंगल में सिपाहियों से बिछड़ गये और एक जंगली कबीले के हाँथ लग गए। इस कबीले वालों का रिवाज था हर साल अपने देवता को एक सेहत-मंद आदमी की बलि दे कर भेट चढ़ाते। राजा राय को भेट चढ़ाने के लिए ले जाने लगे तो उन्हों ने देखा के राजा राय की ऊँगली कटी हुई है। कबीले के सरदार ने कहा के ऐसे आदमी की बलि नहीं दी जा सकती जिस के बदन पर कोई भी चोट हो। 
     इस लिए राजा कृष्णा देव राय को कबीले वालों ने छोड़ दिया। राजा राय सोचने लगे के तेनाली रमन जो कहा वो ठीक कहा। सच में जो हुआ अच्छे के लिए हुआ पर उन के दिमाग में ये भी था के जो होता है अच्छे के लिए होता है पर तेनाली रमन के साथ जो हुआ इस में क्या अच्छा था। 
     राजा कृष्णा देव राय ने महेल आते ही सब से पहले तेनाली रमन को कारागार/jail से बहार निकाला और अपने साथ हुआ सारा माजरा सुनाया जिस पर तेनाली ने कहा ''मैं नहीं कहता था जो होता है वो हमारे अच्छे के लिए ही होता है'' ''महराज आप की ऊँगली कटी हुई थी इस लिए आप की जान बच गई और मैं कारागार/jail में था इस लिए मेरी भी जान बच गई '' तेनाली रमन ने कहा। 
     राजा राय को तेनाली की बात समझ में नहीं आई। तो रामा ने कहा ''महराज अगर मैं कारागार/jail में ना होता तो ज़रूर आप के साथ शिकार पे गया होता। आप की ऊँगली कटी हुई थी इस लिए आप की जान बच जाती पर मुझे कोई चोट नहीं लगी है इस लिए वह मुझे अपने देवता की भेट चढ़ा देते '' इस तरह मेरा कारागार/jail में होना मेरे लिए ही अच्छा था। 
     राजा कृष्णा देव राय ने खुश हो कर तेनाली रमन की समझदारी पर उन्हें भरी इनाम दिया। 

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